BSE, Angel One, और MCX के शेयर्स आज क्यों गिरे? RBI के नए नियमों का पूरा विश्लेषण 📉🛑

आज दलाल स्ट्रीट पर एक बड़ा "सिस्टम अपडेट" देखने को मिला। BSE, Angel One, और MCX जैसे मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर और ब्रोकिंग शेयर्स में 10% तक की भारी गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट का मुख्य कारण है RBI द्वारा 13 फरवरी को घोषित किए गए Capital Market Exposure (CME) के संशोधित नियम, जो 1 अप्रैल, 2026 से लागू होंगे।

एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर और अल्गो ट्रेडर के रूप में, मैं इसे बाजार के "लिक्विडिटी कर्नल" (Liquidity Kernel) में एक बड़ा बदलाव मानता हूँ। आइए समझते हैं कि आखिर क्या बदला है और इसका आप पर क्या असर होगा।


क्या बदलाव हुए हैं? (The Core Update)

RBI ने बैंकों द्वारा ब्रोकर्स को दिए जाने वाले कर्ज के नियमों को बहुत सख्त कर दिया है:

  1. 100% कोलैटरल अनिवार्य (100% Collateral): अब बैंकों को ब्रोकर्स को क्रेडिट देने के लिए पूरी तरह से सुरक्षित (Fully Secured) कोलैटरल लेना होगा। पहले कुछ गारंटी बिना सिक्योरिटी के भी चल जाती थी, लेकिन अब वो "डेप्रिकेट" (Deprecate) कर दी गई हैं।

  2. 40% हेयरकट (40% Haircut): अगर कोई ब्रोकर कोलैटरल के रूप में शेयर देता है, तो बैंक उसकी वैल्यू पर 40% का हेयरकट लगाएंगे। यानी ₹100 के शेयर पर केवल ₹60 का ही कर्ज मिलेगा।

  3. MTF के लिए 50% कैश मार्जिन: मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी (MTF) के लिए बैंक गारंटी का 50% हिस्सा कैश में होना अनिवार्य है। इसमें से कम से कम 25% हार्ड कैश होना चाहिए。

  4. प्रोप-ट्रेडिंग पर रोक (No Bank Funding for Prop Trading): बैंक अब ब्रोकर्स की अपनी ट्रेडिंग (Proprietary Trading) के लिए फंडिंग नहीं दे पाएंगे।


शेयर्स क्यों गिरे? (The Debugging Log)

बाजार इन नियमों को ब्रोकर्स के लिए एक "कॉस्ट ओवरहेड" (Cost Overhead) के रूप में देख रहा है:

  • फंडिंग की लागत बढ़ेगी: बैंक लोन सस्ते होते थे। अब ब्रोकर्स को NBFCs या NCDs (Non-Convertible Debentures) का सहारा लेना होगा, जो महंगे पड़ेंगे。

  • Angel One जैसे ब्रोकर्स पर दबाव: Angel One जैसे रिटेल ब्रोकर्स का MTF बुक बहुत बड़ा है। नए नियमों के कारण उन्हें अपनी फंडिंग स्ट्रक्चर को पूरी तरह से "रीफैक्ट" (Refactor) करना होगा。

  • BSE पर प्रभाव: जेफरीज (Jefferies) का अनुमान है कि इन नियमों से प्रोप-ट्रेडर्स की वॉल्यूम कम होगी, जिससे BSE की अर्निंग्स पर 10% का असर पड़ सकता है。


फायदा किसे होगा? (Who Gets the Root Access?)

  • बैंकों को लाभ: RBI ने बैंकों को M&A (विलय और अधिग्रहण), IPO/FPO लोन और कॉर्पोरेट एक्विजिशन फाइनेंस में ज्यादा छूट दी है। यह बैंकों के लिए "सिस्टम अपग्रेड" जैसा है।

  • बाजार की सुरक्षा: इन नियमों का मुख्य उद्देश्य सट्टेबाजी (Speculation) को कम करना और क्रेडिट क्वालिटी को सुधारना है, ताकि बाजार में कोई बड़ा सिस्टम फेलियर न हो。


The Personal View

एक AMFI रजिस्टर्ड डिस्ट्रीब्यूटर के नाते मेरा मानना है कि यह लंबी अवधि के लिए एक अच्छा "क्लीन-अप" है। BSE के लिए मेरा पहले का टारगेट 3400-3500 था, लेकिन इन नए रेगुलेटरी "बग्स" के कारण अब यह शेयर 2500 से 3000 के बीच रेंज-बाउंड रह सकता है। जब तक ब्रोकर्स नए फंडिंग मॉडल्स के साथ "सिंक" (Sync) नहीं हो जाते, तब तक इन शेयर्स में अस्थिरता बनी रहेगी।

बॉटम लाइन: RBI के ये नियम बैंकों के लिए फायदेमंद हैं लेकिन ब्रोकर्स के मार्जिन को निचोड़ रहे हैं।




Dhaval Visariya

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